T20 वर्ल्ड कप 2026: रिंकू सिंह के पिता नोएडा के अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर; टीम इंडिया छोड़कर घर लौटे

भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मेडिकल इमरजेंसी की वजह से रिंकू सिंह टीम इंडिया का साथ छोड़कर चेन्नई से अपने घर अलीगढ़ लौट आए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में उनका खेलना तय नहीं माना जा रहा है।
पिता को फोर्थ स्टेज का लिवर कैंसर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह को चौथे चरण (फोर्थ स्टेज) का लिवर कैंसर है। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमेगा वन स्थित यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी सेहत पर निगरानी बनाए हुए है और फिलहाल उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, पिता की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से इलाज की पूरी जानकारी ली। उन्होंने कई घंटे अपने पिता के साथ बिताए।
जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में खेलना मुश्किल
भारत और जिम्बाब्वे के बीच सुपर-8 का अहम मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाना है। भारतीय टीम के लिए यह मैच सेमीफाइनल की राह तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी के चलते रिंकू सिंह ने टीम के ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा नहीं लिया। ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ उनका खेलना लगभग मुश्किल माना जा रहा है।
वर्ल्ड कप में अब तक का प्रदर्शन
रिंकू सिंह भारतीय टीम में छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं और उन्हें टीम का फिनिशर माना जाता है। लेकिन मौजूदा वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।
अब तक खेले गए 5 मैचों में वे कुल 24 रन ही बना सके हैं। उनके स्कोर क्रमशः 6, 1, 11, 6 और 0 रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में वे खाता भी नहीं खोल पाए थे। पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ वे नाबाद जरूर रहे, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके।
संघर्ष भरा रहा है रिंकू सिंह का बचपन
रिंकू सिंह का बचपन काफी संघर्षों में बीता है। उन्होंने टेनिस और लेदर बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में उन्होंने मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई के साथ क्रिकेट भी खेला।
एक इंटर-स्कूल टूर्नामेंट में उन्होंने 32 गेंदों पर 54 रन की नाबाद पारी खेली थी। शुरुआती दिनों में क्लब क्रिकेट खेलने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे, इसलिए वे सरकारी स्टेडियम में कार्ड बनवाकर प्रैक्टिस किया करते थे।
मैच खेलने के लिए फीस लगती थी। जब घरवालों से पैसे मांगते तो पिता पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह देते थे। हालांकि उनकी मां उन्हें सपोर्ट करती थीं। एक बार शहर में टूर्नामेंट खेलने के लिए मां ने दुकान से एक हजार रुपये उधार लेकर उन्हें दिए थे।
पिता करते थे गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम
रिंकू सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके परिवार में पांच भाई हैं और उनके पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। कई बार भाइयों को भी इस काम में हाथ बंटाना पड़ता था।
वे सभी भाई बाइक पर सिलेंडर रखकर घर-घर और होटलों में डिलीवरी करने जाते थे। मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ मिलकर पैसे इकट्ठा करके गेंद खरीदी जाती थी और फिर क्रिकेट खेला जाता था।
ट्रेनिंग सेशन में नहीं लिया हिस्सा
भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाले मुकाबले से पहले टीम इंडिया ने नेट्स में अभ्यास किया, लेकिन रिंकू सिंह इस ट्रेनिंग सेशन का हिस्सा नहीं बने। पारिवारिक हालात को देखते हुए टीम मैनेजमेंट ने उन्हें घर जाने की अनुमति दी।
निष्कर्ष
रिंकू सिंह के लिए यह समय बेहद भावनात्मक और कठिन है। एक तरफ देश के लिए वर्ल्ड कप जैसा बड़ा टूर्नामेंट, तो दूसरी तरफ पिता की गंभीर बीमारी। क्रिकेट से ऊपर परिवार होता है, और ऐसे में उनका घर लौटना एक स्वाभाविक फैसला माना जा रहा है।
फिलहाल क्रिकेट फैंस रिंकू सिंह के पिता के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।